प्रीत निभाऊँ

तूँ मेरा  मैं तेरी कान्हा

भला किस विध

फिर  मैं तुम्हें रिझाऊँ

याद करूँ मैं  हर पल तुझको

हो विभोर मैं नीर बहाऊँ

कर लो तुम भी वादा मुझसे

प्रेम तेरा मैं  हरदम पाऊँ

खो जाए धीरज कभी तो

तुझसे ही मैं आस लगाऊँ

कह दो मुझसे ,तुम आओगे

जब जब भी मैं तुझे बुलाऊँ

नींद है गहरी ,उलझ सपनों में

खो कर ख़ुद मे,ख़ुद भरमाऊँ

लीला तेरी है अति न्यारी

घिरी भँवर में ,पर मुसकाऊँ

जाल भ्रम का बना अति सुंदर

सोच सोच चकित रह जाऊँ

टूट ना जाए सपन सलोंना

सोच सोच कभी घबराऊँ

कभी  मैं सोचूँ और विचारूँ

भेद है क्या समझ ना पाऊँ

जब है तू मेरा  ,मैं तेरी हूँ

फिर कियूँ सोचूँ  कियूँ घबराऊँ

तू मेरा ,मैं तेरी कान्हा

पल पल तेरी प्रीत निभाऊँ

 

 

 

10 Comments

  1. mani mani 23/10/2016
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 23/10/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/10/2016
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 23/10/2016
  5. C.M. Sharma babucm 23/10/2016
  6. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 23/10/2016
  7. Kajalsoni 24/10/2016
  8. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 24/10/2016
  9. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 26/10/2016

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