प्यार की दो बूँदों की खातिर – शिशिर मधुकर

मेरे सपनों का महल कई बार मेरे सामने ही ढ़ह गया
टूटा तो मैं पूरी तरह पर फ़िर भी सारी पीर सह गया

एक समय था हर पल इस शहर में कोई मेरे साथ था
कुछ अपनों की चालों में फंसकर मैं अकेला रह गया

प्यार की दो बूँदों की खातिर मैं तो सदा तरसा किया
जिस धार ने मुझको जिलाया उसके संग मैं बह गया

मेरा यहाँ ना कोई हम कदम है ना ही कोई हमराज़ है
मैंने ख़ता की जो मैं उनको अपना खुदा ही कह गया

मुकद्दर अगर जो साथ ना दें तो जिन्दगी खिलती नहीँ
मुझको समझ आया यही मैं जब भी इसकी तह गया

शिशिर मधुकर

20 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2016
  2. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 22/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2016
  3. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 22/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2016
  4. mani mani 22/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2016
  5. C.M. Sharma babucm 22/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2016
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/10/2016
  7. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 23/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir 23/10/2016
  8. Kajalsoni 24/10/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/10/2016

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