कभी नहीं चाहा था

कभी नहीं चाहा था कि इतना व्यस्त हो जाऊँ ,
या अपनी ही दुनिया में खूब मस्त हो जाऊँ ,
कि अपने और अपनों के लिए ही वक्त न रहे।

कभी नहीं चाहा था कि इतनी मशहूर हो जाऊँ ,
किअपनी मिली शोहरत के गरूर में इतना इतराऊं ,
और खुद अपने आप और अपनों से भी दूर जाऊँ।

कभी नहीं चाहा था कि आसमां में ही उडती रहूं ,
कि यथार्य की कठोर जमीं पर टिक भी न पाऊं ,
और जीवन के इम्तेहान में हारती ही जाऊं।

कभी नहीं चाहा था कि इतने   अधिक सुख ,
सुविधा हों  जितनी कि आज है मेरे पास ,
और मैं धीरे पूरी तरह से उन पर आश्रित हो जाऊँ।

मगर इस जीवन में हमेशा ही मनचाहा कहाँ होता है ,
और कितना कुछ अनचाहा भी   झेलना भी पड़ता है।

15 Comments

  1. mani mani 22/10/2016
    • Manjusha Manjusha 22/10/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2016
    • Manjusha Manjusha 22/10/2016
    • Manjusha Manjusha 22/10/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 22/10/2016
    • Manjusha Manjusha 22/10/2016
    • Manjusha Manjusha 22/10/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/10/2016
    • Manjusha Manjusha 22/10/2016
    • Manjusha Manjusha 22/10/2016
  5. C.M. Sharma babucm 22/10/2016
    • Manjusha Manjusha 22/10/2016
    • Manjusha Manjusha 24/10/2016

Leave a Reply