बुनियाद

बुनियाद
कुछ लोग हवाओं से मिलकर दीपक को बुझाया करते हैं ,
पर ऐसे भी कुछ लोग हैं जो हर बार जलाया करते हैं ।
सैयाद ने पिंजड़े के पंछी को आज अचानक छोड़ दिया ,
जैसे देखा कुछ लोग इन्हें सीने से लगाया करते हैं ॥
नफरत की दीवार नहीं टिक सकती है मेरी इस बस्ती में ,
गंगो जमुनी तहजीब इसे हर रोज गिराया करते हैं ।
संस्कार , बलिदान, उसूलों की बुनियाद न हिल सकती ,
अपने बुजुर्गों की तालीम से घर को सजाया करते हैं ।
कोई भी भला हमको कैसे तिरछी नज़रों से देखेगा ,
हम तो कुर्बानी की फसलें हर दिल में उगाया करते हैं ।

8 Comments

  1. babucm babucm 22/10/2016
    • satyadeo VISHWAKARMA satyadeo vishwakarma 22/10/2016
  2. mani mani 22/10/2016
    • satyadeo VISHWAKARMA satyadeo vishwakarma 22/10/2016
    • satyadeo VISHWAKARMA satyadeo vishwakarma 22/10/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/10/2016
    • satyadeo VISHWAKARMA satyadeo vishwakarma 22/10/2016

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