गज़ल

होठों की मुस्कान,नयन का नीर.गज़ल
तेरे दिल में सारे जग की पीर ग़ज़ल
हमने खोली पाँवों,की ज़ंजीर ग़ज़ल
इसके आगे अब तेरी तक़दीरग़ज़ल
हरदम तेरे सपने देखा करता हूँ
तू है मेरे ख़्वाबोंकी ताबीर ग़ज़ल
सबकी ख़ातिर दौलत,शोहरत,मालो-ज़र
शायर की तो है तू ही जागीर ग़ज़ल
धीरे-धीरे आ पहुँची तू सौरभ तक
कहते आये ग़ालिब,मोमिन.मीर ग़ज़ल
-सौरभ

2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 22/10/2016

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