ज़रा भी आप मत. संकोच रखिए

ज़रा भी आप मत. संकोच रखिए
नये कुछ और वादे सोच रखिए
जिगर रखिए भले पत्थर सरीखा
मगर लहजे में,थोड़ा लोच रखिए
नहीं इस बार क्यों बरसीं घटाएँ
कोई अच्छा बहाना सोच रखिए
वो ख़ुद हीभूल जाएगा उड़ानें
परिन्दे के परों को नोच रखिए
ये नज़राना है ये रिश्वत नहीं है
ये पैसे.आप निःसंकोच रखिए

-Rajmurti Saurabh

2 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 22/10/2016

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