मेरा ठिकाना-९ —मुक्तक—डी के निवातियाँ

मैया कहे परिलोक से आयी, कुंवर देश तोहे जाना
पराया धन मेरे आंगन जिसे ब्याज समेत चुकाना
ससुराल में सब ताने मारे, तू अपने मायके जा ना
बिटिया बाबुल से पूछे आखिर कँहा मेरा ठिकाना !!
 

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डी. के. निवातियाँ _______@

18 Comments

  1. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 22/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
  2. mani mani 22/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 22/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
  5. babucm babucm 22/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
  7. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 23/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
  8. Kajalsoni 24/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016

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