बात दिल की कह न पाया…………मनिंदर सिंह “मनी”

बात दिल की कह न पाया,
दूर तुम से रह न पाया,

कश्मकश सी दिल में मेरे,
चाह कर भी कह न पाया,

देख तुझ को जी रहा मैं,
तेरे दिल में रह न पाया,

झील सी है ऑंखें तेरी,
पर कभी मैं बह न पाया,

देख तुझ को आहें भर लू,
लफ्ज़ ढाई कह न पाया,

तेरे अहसास लिए मन में,
सोचता क्यों कह न पाया

नोट:- आप सभी गुणी जनो से अनुरोध है की मैंने यह ग़ज़ल २१२२ २१२२ बह्र पर लिखी है आप सभी से निवेदन है की मेरा मार्गदर्शन करे अपने सुझाव दे कर………..

12 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 19/10/2016
    • mani mani 21/10/2016
  2. babucm babucm 20/10/2016
    • mani mani 21/10/2016
  3. Markand Dave Markand Dave 20/10/2016
    • mani mani 21/10/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/10/2016
    • mani mani 21/10/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/10/2016
    • mani mani 21/10/2016
  6. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 20/10/2016
  7. mani mani 21/10/2016

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