इंसानियत…… The Ultimate Fight

न जाने कितनी चोटें खायी मैंने

न जाने कितने स्वांग रचवाए मैंने……

 

कभि ठेकेदारों के गुट ने मेरा बलात्कार किया

कभि नेताओं ने मेरा रूह तार-तार किया….

 

कभि जाहिलों ने मुझपे वार किया

कभि पढ़े-लिखों ने मुझे शर्मशार किया ….

 

कभि टेबल के निचे मेरी धज्जियां उडाई गयी

तो कहीं मुझे बेच कर रंगरलियाँ मनाई गयीं ….

 

कहीं बाप-बेटे ने ही मिलकर मुझे बेच खाया…

तो कहीं शिक्षक-विद्यार्थी ने मेरा मजाक बनाया …

 

कहीं लोगों का मुझपर से विश्वाश उठ गया…

कहीं गरीबों का मेरी वजह से दिल टूट गया ….

 

रह गयी हूँ आज मै इंसानियत बस लफ़्ज़ों में…

लिखा जाता है मुझे बस अब कोरे पन्नों में…..

 

पर रख लो मेरी बात गाँठ बाँध के

आउंगी फिर से मै बहुत शान से….

 

अस्तित्व की लडाई फिर मै नहीं वो लोग लड़ेंगे….

जो और आगे लालच की सीढियां चढ़ेंगे…

 

भविष्य में इतिहास खुद को फिर से दोहराएगा

फिर मदद को एक नहीं सौ हाथ आगे आएगा…..

14 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 18/10/2016
    • shrija kumari shrija kumari 18/10/2016
  2. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 18/10/2016
    • shrija kumari shrija kumari 18/10/2016
  3. Manjusha Manjusha 18/10/2016
    • shrija kumari shrija kumari 18/10/2016
  4. mani mani 18/10/2016
    • shrija kumari shrija kumari 18/10/2016
  5. Kajalsoni 18/10/2016
    • shrija kumari shrija kumari 18/10/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/10/2016
    • shrija kumari shrija kumari 19/10/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/10/2016
  8. shrija kumari shrija kumari 19/10/2016

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