दे कलम को धार — ग़ज़ल-नज्म — डी. के. निवातियाँ

दे कलम को धार अब तलवार बनाना होगा !
भर लफ्जो की हुंकार हथियार बनाना होगा !!

जब बात बने ना मान मुनव्वल से, जान लो
अपने डंडे की ताकत अब आजमाना होगा !!

बहुत हुई बाते मान – मुनव्वल की बेनतीजा !
लगा शेर की दहाड़ असल रूप दिखाना होगा !!

न हम कायर, अत्याचारी, न समझो बेगैरत
बिना युद्ध के सबक सिखादे ये बतलाना होगा !!

न खेलेंगे कोई खेल खूनी तुम समझ लो जानी
न माने तो बदले में, शब्द बाण चलाना होगा !!

सरहद की रखवाली करते भारत माँ के सपूत !
लालो की रक्षा में, रक्त कलम से बहाना होगा !!

सुनो दुनिया वालो सत्य अहिंसा के हम पुजारी !
आन बचाने को “धर्म” की, शस्त्र उठाना होगा !!

दे कलम को धार अब तलवार बनाना होगा !
भर लफ्जो की हुंकार हथियार बनाना होगा !!

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डी. के. निवातियाँ _________@@@

16 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 09/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2016
  4. C.M. Sharma babucm 09/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2016
  5. C.M. Sharma babucm 10/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2016
  6. Madhu tiwari madhu tiwari 11/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2016
  7. M Sarvadnya M Sarvadnya 11/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2016
  8. vijay kumar singh 12/12/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/12/2016

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