सरहद–मुक्तक–डी के निवातियाँ

भायी न भाई को भाई की सूरत, बँटवारा कर डाला
जन्मे थे एक कोख में, लालच ने दुश्मन बना डाला
हमने तो सरहदे बनायी थी अमन-ओ-चैन के लिये
ज़ालिमो ने उसको भी मैदान -ऐ -जंग बना डाला !!

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डी के निवातियाँ

18 Comments

  1. babucm babucm 25/10/2016
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  2. vinod kumar dave vinod kumar dave 25/10/2016
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/10/2016
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  4. sarvajit singh sarvajit singh 26/10/2016
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 26/10/2016
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  6. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 26/10/2016
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  7. Kajalsoni 27/10/2016
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  8. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 28/10/2016
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017

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