ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी जरा थम तो सही तू,
ऐ ज़िन्दगी जरा रुक तो सही तू
जो कुछ भी हूँ मैं सब तेरा एहसान सब तेरा एहसान है.
किसलिए हैरान है तू मेरी ये हालात पे,
जो कुछ भी हूँ मैं सब तेरी मेहरबानी है
ऐ ज़िन्दगी अब तू रूठ न मुझसे
अपना ले मुझको या मौत से मिला दे
मैं टुटा हुआ इक परिंदा हु,
मुझसे रूठने का हक़ खो सा दिया है तू,
मुझपे करदे करम अब तो करदे करम
मेरे कदम भी अब तो लरखराने लगे है
मेर आँखों के आंशू खो से गए हैं,
तू सफर मैं रखा तुझसे शिकायत नहीं है,,

अब तो मुझे मेरी मंज़िल मिला दे ऐ ज़िन्दगी
थक सा गया हूं मैं इस सफर मैं,
ऐ ज़िन्दगी गर मुमकिन है ये तो मुझे मेरे अपनों से इक बार मिला दे,बहुत दूर आ गया मैं सफर में तेरे संग ,
वो भी मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे,उनकी भी आँखों से आंसू निकलते होंगे,
थक सा गया हूं में सफर ऐ ज़िन्दगी कर दे कोई करम -इतना एहसान कर तू गर मुमकिन नहीं है ये तो फरयाद सुनले मेरी,मुझे मौत से मिला दे ऐ ज़िन्दगी इतना एहसान कर मुझे मौत मौत दे तू ऐ ज़िन्दगी।।

5 Comments

  1. mani mani 18/10/2016
    • Chandan9217 Chandan9217 18/10/2016
  2. Chandan9217 Chandan oberoy 18/10/2016
  3. babucm babucm 18/10/2016
    • Chandan9217 Chandan9217 18/10/2016

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