गाँव गाँव गली गली शहर शहर आज ,
जाके जन जन को यही तो समझाना है ,
जल बिनु तड़पें मछली सरीखे हम ,
इसके ही पहले लोगों को ए बताना है ,
जलचर, नभचर,थलचर के लिए ही ,
बेटी बेटा सम आज जल को बँचाना है ,
विश्वयुद्ध हो न कहीं अगला इसी के लिए ,
घर घर यही संदेशा पहुंचाना है ।
Nice messages through poem
nice thought ……………….!!
सुन्दर…………..