ऑसु

ऑसु

अब तो हर दिन
ऑसुओं मे निकलना है
कभी छुप कर तो
कभी हँस कर हमे रोना है
ज़ख़्म औरों को दिखाने से
वो नसिहत देंगे
दर्द के एहसास को
कोई न समझ पाएगा
जिसपे बिती है वही
साथ लिए जाएगा
अश्क पोछेगा कोई
आँके तेरी ऑखो से
ऐसा सोचेगा भी तो
एक दिन पछताएगा
तू परेशान न हो
कोई तेरे साथ नहीं
हैरान होना जब
पास कोई आएगा
साथ अब देता नहीं
मतलब के बिना
कोई इस जमाने में
अब तो यारी भी
तिजारत के लिए करते हैं
कोई साथ दे हर कदम
ये उम्मीद भी बेमानी है
संग दे ता-उम्र
दिल की जो जुबनी है
यही ऑसु है जो
साथ तेरे जानी है
मुझे सुकून है मेरे पलकों पे
अब भी पानी है ।

4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 17/10/2016
  2. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 17/10/2016
  3. Kajalsoni 17/10/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/10/2016

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