“क्षणिकाएँ”

( 1 )
अपनेपन की धूप
कुछ कुनकुनी सी है
नील निर्झर दृगों का गीलापन
गवाह है इस बात का
उस पार के ग्लेशियर
पिघलने लगे हैं .
( 2 )
कौन से ईंट – गारे से तुमने
जिद्द का मजबूत पुल
तैयार किया है ?
स्नेहभाव से कितनी भी सेंध लगाओ
फेवीकोल के जोड़ से भी
मजबूत और गाढ़ा जोड़ है
लाख जतन करो टूटता ही नही .
XXXXX

“मीना भारद्वाज”

10 Comments

  1. ALKA ALKA 16/10/2016
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 16/10/2016
  2. C.M. Sharma babucm 16/10/2016
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 16/10/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/10/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 17/10/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/10/2016
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 17/10/2016
  7. नीतू 22/11/2016
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 24/03/2017

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