बहते अश्क । – मार्कण्ड दवे ।

इकतार बहते अश्क, अपने आप कभी रोते नहीं,
ग़म-ए-उलफ़त का ज़ुल्म है ये, जो कभी सोते नहीं..!

इकतार = अविरत;
अश्क = आंसू;
ग़म-ए-उलफ़त = नाकाम प्यार का दर्द;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ३० जुलाई २०१६.

bahate-ashk

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/10/2016
    • Markand Dave Markand Dave 17/10/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/10/2016
    • Markand Dave Markand Dave 17/10/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 17/10/2016
    • Markand Dave Markand Dave 17/10/2016

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