यादें


यादें

याद जो मुझको वो थी

भूली बिसरी कहानियॉ

बूँद सी वो यूँ गिरी

मिट गई निशानीयॉ

बुलबुले उठे नहीं

जल मे वो यूँ मिल गई

कोहरे में खोई हुई सी

याद की वो दास्तान
घाव वो भरा नहीं

बन गई नासूर अब

यॉदें थी जो अब तलक

मिटाने को सोचता हूँ

लेकिन अब मिटती नहीं

कुछ घाव तो भर जाते हैं

यादों के जख्म भरते नहीं

ज़िंदगी भर साथ रहती

संग चलती जाती है

लोग मिट जाते हैं लेकिन

यादें मिट पाती नहीं ।

3 Comments

  1. babucm babucm 15/10/2016
    • sunil kumar jaiswal 16/10/2016
  2. babucm babucm 17/10/2016

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