मेरा ठिकाना -६—मुक्तक—डी. के. निवातियाँ

हर किसी का होता है जहान में एक ठिकाना
राहे भले हो जुदा-जुदा मंजिल सभी को पाना
उम्र बिता देता है हर कोई ये पहेली बुझाने में
ना जान पाता कोई, कि कहाँ है मेरा ठिकाना !!
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@_____डी. के. निवातियाँ ____@

21 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 18/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016
  2. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 18/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016
  3. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 18/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016
  4. shrija kumari shrija kumari 18/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016
  5. C.M. Sharma babucm 18/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016
  6. Kajalsoni 18/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016
  7. shrija kumari shrija kumari 18/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016
  9. mani mani 18/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016
  10. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/10/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/10/2016

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