हालात ऐ ज़माने……….मनिंदर सिंह “मनी”

ईष्या, शराब, शबाब, बन गया जहर,
हर जिस्म में है घर कर गया जहर,

पत्थर दिल लोगो से भरा सारा शहर,
खुद से बिलकुल बेखबर हुआ शहर,

हारे हुए लोगो से भरी हुई हर नहर,
दे ना कोई जान खुद प्यासी हुई नहर,

निर्धन को देख धनी बरपा रहा कहर,
लगता डर गयी प्रकर्ति देख इंसानी कहर,

जल जाये बेटी दाज के लिए किसी भी पहर,
बेमांगी मुराद समझते बेटी को जन्म के पहर,

ना सुनता, ना सुनाता कोई प्यार की बहर,
दादी, नानी को याद नहीं कोई अब बहर,

जज्बात, संस्कार ले गयी बहा कोई लहर,
छोड़ रही वीरानी, हर चेहरे पर जाती लहर,

देख हालात ऐ ज़माने के होता नहीं ठहर,
कुछ कर गुजरने की चाह लिए “मनी” तू ठहर,,

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 15/10/2016
    • mani mani 15/10/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 15/10/2016
    • mani mani 18/10/2016
  3. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 16/10/2016
    • mani mani 18/10/2016
  4. Tushar Gautam Tushar Gautam 16/10/2016
    • mani mani 18/10/2016

Leave a Reply