संजीदगी । – मार्कण्ड दवे ।

बड़ी बेदर्द है, बेशक़ीमती निवाजिश, ज़िंदगी भी,
ख़त्म कर देती है, जवाँ होते-होते, संजीदगी भी..!

बेदर्द = निर्दय; निर्मम;
बेशक़ीमती = बहुमूल्य;
निवाजिश = कृपा,दया;
संजीदगी = उद्वेगहीनता,शांतचित्तता;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २० अगस्त २०१६

sanjidagi

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/10/2016
    • Markand Dave Markand Dave 16/10/2016
  2. babucm babucm 15/10/2016
    • Markand Dave Markand Dave 16/10/2016

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