बहते जल के साथ न बह

बहते जल के साथ न बह

कोशिश करके मन की कह।
मौसम ने तेवर बदले

कुछ तो होगी खास बज़ह।
कुछ तो खतरे होंगे ही

चाहे जहाँ कहीं भी रह।
लोग तूझे कायर समझें

इतने अत्याचार न सह।
झूठ कपट मक्कारी का

चारण बनकर गजल न कह।

Leave a Reply