” ये दिल “…… काजल सोनी

दिल दरिया था तेरा ,
जिसमें मैं समा न सकीं ।
जगह छोटी थी या बड़ी ,
अंदाजा ये लगा न सकीं ।

ठिकाना ढूंढती रहीं मैं उनके दिल पर ,
बस कर दिल में उनके,
मेरे दर्द का ठिकाना न रहा ।

आँसुये कर जाते है कमजोर दिल को ,
पर जब ये बहते हैं ,
दिल को राहत बड़ी मिलती हैं । ।

“काजल सोनी “