पितृ पक्ष में श्राद्ध

क्वार-मास के कृष्ण-पक्ष में, श्राद्ध-पक्ष जब आता है।
पितरों को तर्पण करके नर, परम तोष हिय पाता है।।
शुचि-सावन में सभी पितर जब, मृत्यु लोक में आते हैं।।
पुत्र-पौत्र से श्राद्ध ग्रहण कर, दुख हर दूर भगाते हैं।।

आदित्य-रुद्र-वसु तीन यहां, श्राद्ध देव कहलाते हैं।
संतुष्ट अगर वे हुए श्राद्ध से, पितर मुक्त हो जाते हैं।।
श्रद्धा से यदि श्राद्ध करें हम, घर-दर शुचि हो जाते हैं।
सत्कार-प्रेम के बदले हम, आशीष सुखों का पाते हैं।।

माँ बाप धरा पर देव तुल्य, सदा स्नेह बरसाते हैं।
एक बार जो गए जगत से, यादों में रह जाते हैं।।
जीवन मात-पिता की महिमा, समझ नही जो पाता है।
तव सेवा के पुण्य-कर्म से, वंचित वह रह जाता है।।

जीते जी सम्मान नहीं तो, श्राद्ध एक घोटाला है
मात पिता के चरणों में ही, स्नेह-सुधा का प्याला है।
वचन-कर्म और सहज-भाव से, पावन पर्व मनाना है।।
विधि संयम से तर्पण करके, अपना फर्ज निभाना है।।
(शिल्प- ताटंक छंद)
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सुरेन्द्र नाथ सिंह ‘कुशक्षत्रप’

12 Comments

  1. Dr Chhote Lal Singh Dr C L Singh 28/09/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 28/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/09/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 28/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/09/2016
  5. Markand Dave Markand Dave 28/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/09/2016
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 28/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/09/2016
  7. mani mani 28/09/2016

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