चादं भाग रहा खुद से

गोधूलि की बैला थी
सब चुप थे
सूरज अपने घर को
लोटने की तैयारी
कर चुका था
कहीं बूँद गिरी थी
बादल पिघले थे
चादं चुप चाप खड़ा
सहमा सा था
न जाने कब से
खुद से ही
भाग रहा था
शायद तुम वहाँ थी….

कपिल जैन

5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/09/2016
    • कपिल जैन kapil jain 28/09/2016
  2. Markand Dave Markand Dave 28/09/2016
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 28/09/2016

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