अमर भगत सिंघ

नमन शहीदे-ए-आज़म तुम्हे ,जो लहू से इस देश को सींच दिया ।
बेहरी अंग्रेजी हुकूमत को ,बम धमाके से हिला दिया ॥
इंकलब का नारा अस्सेम्ब्ली से देश भर मैं गुंजा दिया ।
ए सरफरोश तेरी मौत ने,मुझे जीना सीखा दिया ॥

जिस्म पर कोडे पड़े कितने,जख्मों पर नमक तक रगड़ दिया ।
हँस-हँसकर सहें हर सितम,पर चीख ना निकलने दिया ॥
बेहते हुए खून से तूने तब भी हिन्दुस्तान जिन्दाबाद लिख दिया ॥
ए सरफरोश तेरी मौत ने,मुझे जीना सीखा दिया ॥

सरहद के भेडियों से लड़ने माँ ने भगत सिंघ को भेज दिया ।
जाते-जाते मर-मिटाने का वादा माँ से कर दिया ॥
सत-सत नमन जननी तुम्हे जो वतन की राहों मैं अपना लहू कुर्बान कर दिया ।
ए सरफरोश तेरी मौत ने,मुझे जीना सीखा दिया ॥
-विक्रम जज्बाती

4 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/09/2016
  2. Markand Dave Markand Dave 28/09/2016
  3. Vikram jajbaati Vikram jajbaati 15/10/2016

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