अहसान ज़माने का है यार मुझ पर

अहसान ज़माने का है यार मुझ पर

किस ज़माने की बात करते हो
रिश्तें निभाने की बात करते हो

अहसान ज़माने का है यार मुझ पर
क्यों राय भुलाने की बात करते हो

जिसे देखे हुए हो गया अर्सा मुझे
दिल में समाने की बात करते हो

तन्हा गुजरी है उम्र क्या कहिये
जज़्बात दबाने की बात करते हो

गर तेरा संग हो गया होता “मदन ”
जिंदगानी लुटाने की बात करते हो

मदन मोहन सक्सेना

7 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/09/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 27/09/2016
  3. mani mani 27/09/2016
  4. C.M. Sharma babucm 27/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/09/2016

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