गुरु कि पहचान

गुरु कि पहचान

“गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देव महेश्वरः

गुरु साक्षात् परम् ब्रह्मा तस्मै श्री गुरु दैवय नमः”

गुरु कि गरिमा, गुरु कि महिमा

गुरु होतें हैं महान

सारा जगत है नत मस्तक

गुरु कि शक्ति को जान

गुरु कि गरिमा, गुरु कि महिमा

गुरु होतें हैं महान

 

“बिन गुरु ज्ञान नहीं”

मन्त्र है ये,  मगर

फिर भी, किसी को ध्यान नहीं

दर-दर है, सब ठोकर खाता

हे ईश्वर !  हे विधाता !!

क्या है ? इक सच्चे, गुरु कि पहचान

गुरु कि गरिमा, गुरु कि महिमा

गुरु होतें हैं महान

 

आज हम मानव कि शिक्षा

चल-आ इनकी, करें समीक्षा

दृढ़ शक्ति – दुर दृष्टी,

फिर, दृढ़ इच्क्षा थी इनकी पहचान

सारा जगत है नत मस्तक

गुरु कि शक्ति व् महिमा को जान

 

पर आज !! आह्त हूँ मै हो रहा

कैसे ? गुरु कि, पहचान खो रहा

हम सब हैं,  इसके साक्षी

जो आज-कल, स्कूलों में हो रहा

शिक्षा को कर ब्य्वसायी

स्कूलों से घर तक लें आयीं

टूशन व् पैसे के खातिर

नैतिकता और संस्कार खो रहा

आह्त हूँ मै हो रहा

कैसे ? गुरु कि, पहचान खो रहा

 

शर्म से, झुक जाता हूँ मै

दर्द से, भर आता हूँ मै

कैसे करूँ ? आज मै

गुरु कि महिमा का बखान

गुरु होते थे महान

सारा जगत हो जाता नत मस्तक

गुरु कि शक्ति को जान, शक्ति को जान

 

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3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/09/2016
  2. babucm babucm 27/09/2016

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