उड़ी के शहीदों को श्रद्धांजलि में समर्पित कविता

“शत-बार नमन”

ऐ वतन के रहनुमावों , चैन कि सांस हो ले रहे

नज़र उठा के देख, गद्दार पड़ोसी क्या कर रहे  ?

कब तक सोते रहोगे-कब तक खोते रहोगे

सत्य-अहिंसा के नींव पे, अबतक हमने कितनी रुसवाईयाँ देखी है

आज भी शैतान कि तरह वो , नंगा नाच कर खून कि होली खेली है

मेरे जवानों के जनाजों से , धोखा से रक्तधार कर रहे

ऐ वतन के रहनुमावों , चैन कि सांस हो ले रहे

नज़र उठा के देख, गद्दार पड़ोसी क्या कर रहे  ?

शत शत नमन करता हूँ उन वीर जवानों को

तीन रंगों में रंगा कफ़न मेरे वीर सपूत मस्तानों को

जीवन-जीवट के हैं वो प्रहरी

ना भूलें न भूल पाउँगा ,

देश है करता नतमस्तक  इन वीर बलिदानों को

फिर से वो गद्दार , अहिंसा को ललकार रहे

आतंक – धोखा से वो अपना फिज़ा है सवांर रहे

ऐ वतन के रहनुमावों , चैन कि सांस हो ले रहे

नज़र उठा के देख, गद्दार पड़ोसी क्या कर रहे  ?

सोंचो उन परिवारों का, उनके सपने और बहारों का

ना ख़ुशी न कोई दर्द रुलाने वाला है

ये उनका हीं नहीं , पुरे वतन का एक दाग-धब्बा काला है

मिटा कर दम लेंगे इन गद्दारों को ,

होश में आ जाओ अब तेरी खैर नहीं ,

नाम आँखों से हूँ देख रहा,

इन वीर सपूत जवानो के बदौलत

भारत कि शान व् तिरंगा विश्व में फहराने वाला है

सोंचो उन परिवारों का, उनके सपने और बहारों का

ना ख़ुशी न कोई दर्द रुलाने वाला है

ऐ वतन के रहनुमावों , चैन कि सांस हो ले रहे

नज़र उठा के देख, गद्दार पड़ोसी क्या कर रहे  ?

कब तक सोते रहोगे-कब तक खोते रहोगे

9 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 26/09/2016