दो लमहों की जिऩदगी

हर एक गम को मुसकराहट में छिपा लेता हूं मै,

जब भी कभी मुशकिल में होता हूं तो मुसकुरा लेता हू मै.

ये ही तो जिनदगी को जीने का अनदाज है मेरा,

तभी तो सबकी खुशी में हसतां और मुसकुरा लेता हू मै.

काश की मेरी भी जिनदगी किसी के काम आ जाए .

ये ही दुआ खुदा से हर रोज मांग लेता हूं मैं.

इसी उमीद मे कि कब जिनदगी की आखिरी शाम आ जाए,
हर एक लमहें को खुशी से जीता और मुसकुरा लेता हूं मै.

हर एक गम को मुसकराहट में छिपा लेता हूं मै,

जब भी कभी मुशकिल में होता हूं तो मुसकुरा लेता हूं मैं……..

6 Comments

  1. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 26/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/09/2016
  4. babucm babucm 26/09/2016
  5. Kajalsoni 26/09/2016

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