बोलता ये ही नीला गगन, अब बहुत हो चुका है रुदन दुश्मनों का करो ना मनन, गोलियों से करो आचमन

पैरोडी -मेरे मेहबूब मेरे वतन तुझपे कुर्बान मैं जानेमन
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हो गयीं बहुत मन कीं बातें
अब तो गोली की बात करो
दुश्मन की दुखती रग पकडो
उस पर गहरा आघात करो

जय माँ भारती, जय माँ भारती
जय माँ भारती, जय माँ भारती

We are losing our passion
passion, passion, our passion

बोलता ये ही नीला गगन
अब बहुत हो चुका है रुदन
दुश्मनों का करो ना मनन
गोलियों से करो आचमन

बाँध टूटा है अब सब्र का, रोज़ हमलों का होता कहर
गुलशनो की थी वादी कभी,घाटियों में उबलता ज़हर
शीत ज्यादा ही स्वर थे सदा इसलिए -2
अब शुरू हो गयी है सड़न
बोलता ये ही नीला गगन ————

“पन्ना माँ बोलती यही, बेवाए भी बोलतीं,
बूढ़ीं आँखें डबडबाईं, छातीं सभी खौलतीं”

जो था नापाक ही जन्म से, क्यों उसी पर भरोसा किया?
देके अमृत का उपहार क्यों, आज कैसा ज़हर ये पिया ?
उसके छोटे उदर से ही आतंक की -2
वादियों का हुआ अवतरन
बोलता ये ही नीला गगन ———–

पहले घायल हुआ कोट है, फ़िर भी बदली नहीँ चाल है
आज उजडा उरी तो लगा, आगे दूजा किया गाल है
गाल दोनों पिटे हो थपेड़ों से तुम-2
हो रहा शौर्य का अब पतन
बोलता ये ही नीला गगन ———–

वीर अपने सहें बेबसी, इससे पहले मनोबल गिरे
हाथ खोलो बँधे जो रहे, दो मिनट में ही जल-थल घिरे
एक आदेश देकर के देखो उन्हें -2
शत्रु हो जाए जिन्दा दफन
बोलता ये ही नीला गगन ———

जानते देशप्रेमी सभी, देश में कितने जयचंद हैं
आज फन उनके डालो कुचल, बांबियों में पड़े बंद हैं
हम भी तैयार हैं आज उनके लिए-2
बाँध के सर पे अपने कफ़न
बोलता ये ही नीला गगन ——-

ना है मंजूर तिल-तिल मरें, कर दो ऐलान अब युद्ध का
खो रही हो जो पहचान तो, ज्ञान बांटो नहीँ बुद्ध का
फूटें चिंगारियां शौर्य कीं तो सुनो -2
तम का हट जाएगा आवरन
बोलता ये ही नीला गगन ——

पहले तोड़ा था दो में उसे, चार खण्डों में अब तोड़ दो
एक ब्रह्मोस घाटी में हो, एक लाहौर में छोड़ दो
देता धमकी हमेशा वो परमाणु की-2
उसका ही कर दो ऊर्ध्वा-पतन
बोलता ये ही नीला गगन ———

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

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