फुरसत के पल- धीरेन्द्र

हाँ चल चलें
मीलों दूर तक पैदल चलें
आ चल मेरे फुरसत के पल
आज फिर साथ चलें कुछ बात करें
मुद्दत हुई जब, पिछली बार मिले थे
बेशक ही तुम्हे मुझसे, कई शिकवे गिले थे
हाँ जिंदगी से दोस्ती की जुर्रत की मैंने
पर इसकी भी क्या खूब सजा दी तूने
चल आ फिर से कुछ करामात करे
बेहतर कुछ दिल-ए-हालात करें
आ चल मेरे फुरसत के पल
आ साथ चल चलें

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 25/09/2016
  2. Kajalsoni 26/09/2016

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