वे लोग – आलोक पान्डेय

~~~वे लोग~~~

उदासीन जीवन को ले
क्या- क्या करते होंगे वे लोग
न जाने किन – किन स्वप्नों को छोड़
कितने बिलखते होंगो वे लोग|
कितने संघर्ष गाथाओं में,
अपनी एक गाथा जोड़ते होंगे वे लोग
पर भी, असहाय होकर
कैसे – कैसे भटकते होंगो वे लोग|
कुछ बाधाओं से जूझते परास्त नहीं
कैसे होते होंगे वे लोग;
जीवन को दाँव लगा राष्ट्र हित में,
मिटने वाले कौन होते होंगे वे लोग|
गरीबी में तन मन को बढा
उच्चाकांक्षाओं को छूते होंगे वे लोग
उत्कृष्ट ‘आलोक’ को विश्व पटल पर ला
गौरवशाली कौन होते होंगे वे लोग|
जीवन व्रत में निरत , दृढ
कैसे आक्रांताओं को तोड़ते होंगे वे लोग
त्याग तन, स्वदेश का मस्तक बढा
ये स्वदेशी कौन होते होंगे वे लोग |

अखंड भारत अमर रहे
जय हिन्द!!!

———–_–_——_©कवि आलोक पान्डेय

3 Comments

  1. कवि मनोरथ लाल 26/09/2016
  2. कवि मनोरथ लाल 26/09/2016

Leave a Reply