ढूँढ़नेवालों को मेरे कई निशान मिले

ढूँढ़नेवालों को मेरे कई निशान मिले
मुझी से टकराये पत्थर लहूलुहान मिले।

मुझे भी मेरे गुनाहों के कई निशान मिले
मुझे माफ करने वाले कई इंसान मिले।

हाल मत पूछो मेरे इस रोशन शहर का
आग में सुलगते यहाँ कई इक मकान मिले।

यहाँ चप्पे चप्पे कई मंदिर मस्जिदें मिली
पर सड़क पे आते-जाते सब शैतान मिले।

छोड़ दूँ मैं अपनी इस खुदकुशी की सोच को
अगर कोई कातिल मुझे भी मेहरबान मिले।

सुना था कि तुम्हारी जुबान ही नहीं चलती
हर कब्र पे तिरी बदजुबान के निशान मिले।

मुझे काँधा देनेवाले जो भी लोग मिले
वे सभी मेरी तरह नामवर हैवान मिले।
—- भूपेन्द्र कुमार दवे

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5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/09/2016
  2. C.M. Sharma babucm 24/09/2016
    • bhupendradave 24/09/2016

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