सारा भारत गूंज उठा है::Er Anand Sagar Pandey

**सारा भारत गूंज उठा है सांपों की फुफकारों से**

 

 

लोकतंत्र जब भरा हुआ है खुद अपने हत्यारों से,

तब कैसी उम्मीद करें हम इन कोढ़ी सरकारों से l

 

 

लोकतंत्र का मन्दिर कहना मन्दिर का अपमान ही है,

सौ-सौ लाशें चीख रही हैं संसद की दीवारों से l

 

 

आस्तीन में जाने कितने सांप छुपाये थे हमने,

कि सारा भारत गूंज उठा है सांपों की फुफकारों से l

 

 

जहां प्यार की बात चले तुम प्यार चले तुम प्यार लुटाओ अच्छा है,

जहां तलवारों की बात चले वहां बात करो तलवारों से l

 

 

दुश्मन से गर बात करो तो बात समझ में आती है,

पर बात समझ के बाहर है जब बात चले गद्दारों से l

 

 

फ़िर बटवारे पनप उठे हैं गांधीवादी गीतों में

और भारत मुर्दाबाद सुना है आज़ादी के नारों से l

 

 

मेरी थाली में खाते हैं और पैरवी दुश्मन की,

देशद्रोह की बू आती है बिके हुए अखबारों से l

 

 

लोकतंत्र की हत्या से कुछ पर्वत मन में उपजे हैं,

अब मैं उनको काट रहा हूं अल्फाज़ों के वारों से l

 

 

चीख रहा हूं मैं क्योंकि मेरी नैतिकता घायल है,

ये गांधीवादी ढोंग नहीं हो पाता है खुद्दारों से l

 

 

माफ़ करो मैं शबनम वाली वाणी बोल ना पाऊंगा,

शब्द व्यंजना दहक रही है भावों के अंगारों से l

 

 

जब लाशों के उपर बैठी बन्दूकें आवाज करें,

तब समाधान मुमकिन है केवल आग भरे हथियारों से ll

 

 

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           -Er Anand Sagar Pandey

9 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/09/2016
  4. C.M. Sharma babucm 24/09/2016
  5. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 24/09/2016
  6. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 25/09/2016

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