इंतज़ार है


एक नयी सुबह का इंतज़ार है
छाया अभी अन्धकार है
बीच मझदार में है कश्ती,
और किनारा उस पार है
एक नयी सुबह का इंतज़ार है
मुसीबतों की कतार है,
मुश्किलें हज़ार हैं
चाहे बाधा लाखों आएं,
तुझे रहना तयार है
राह में जो दीवार है,
उसमे पड़ रही दरार है
कौन रोक सका तुझे ,
मिला हौसला हर बार है
समय की ये गुहार है,
मंजिल की ये पुकार है
करना है लक्ष्य हासिल,
बस ये धुन सवार है
छाया अभी अन्धकार है,
एक नयी सुबह का इंतज़ार है
20160913_142614
Find more at मेरी कलम से…

5 Comments

  1. अकिंत कुमार तिवारी 24/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/09/2016
  3. Kajalsoni 24/09/2016
  4. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 24/09/2016

Leave a Reply