आना पड़ेगा

जगति है आशा कि किरण

और मिट जाती है

मौजों से लड़ती कश्ती

लहरों से कियूँ टकराती है

जब मिलती नहीं मंज़िल

सोच सोच घबराती है

है खेल आशा निराशा का

भँवर में फँसी  कश्ती

कहाँ किनारों को ढूँढ पाती है

 

जाना है उस पार

साथ देता नहीं पतवार

करते हैं हम पुकार

रुक सकोगे क्या भरतार

 

तुम्हें आना पड़ेगा

भरोसे को हमारे

निभाना पड़ेगा

जगाया है जो विश्वास

तो पार लगाना पड़ेगा

कान्हा तुम्हें आना पड़ेगा

है इक समंदर यह ज़िंदगी

उछालों के संग उछलना पड़ेगा

धर  धीरज लय पे उनकी

मचलना पड़ेगा

ऊँचाइयों और गहरायीयों में

उभरना और डूबना पड़ेगा

बन आशा की किरण

कान्हा तुम्हें आना पड़ेगा

आना पड़ेगा

 

 

18 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/09/2016
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 24/09/2016
  3. नवल पाल प्रभाकर नवल पाल प्रभाकर 24/09/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 02/01/2017
  4. C.M. Sharma babucm 24/09/2016
  5. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 24/09/2016
  6. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 24/09/2016
  7. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 24/09/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 24/09/2016
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/09/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 24/09/2016
  9. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/09/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 24/09/2016
  10. Kajalsoni 24/09/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 24/09/2016
  11. ALKA ALKA 26/09/2016
  12. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 27/09/2016

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