” औरत “……… काजल सोनी

लोग पूछते हैं उम्र मुझसे ,
तो मैं बता नहीं पाती ।
जिंदगी अब तक ,
जी हैं मैंने कितनी ,
सही हिसाब लगा नहीं पाती ।

बनकर किसी की अमानत ,
रहती हु बैठी आज ,
खुद को छुपा कर ,
ठीक से आँचल अपना फैला नहीं पाती ।

लग जाते हैं कई दाग मुझपर ,
लगते दागों से दामन बचा नहीं पाती ।
उंगलियों उठती है आज ,
मेरी खुशियों पर ,
उन सवालों के जवाब खुद से मिटा नहीं पाती।

जी रही हूँ किसकी खातिर ,
बदल रहा पल पल नसीब मेरा ,
क्या हुं मैं ,
खुद को ये कभी समझा नहीं पाती ।

किसके लिए कब,
जीना पड़ा मुझे ,
जानकर भी ,
अहसास उसे दिला नहीं पाती ।
लोग पूछते हैं उम्र मेरी ,
तो इसलिए मैं बता नहीं पाती ।

22 Comments

    • Kajalsoni 24/09/2016
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016
  3. C.M. Sharma babucm 23/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016
  6. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 24/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 24/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016
  8. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 24/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016
  9. Subhash 24/09/2016
    • Kajalsoni 24/09/2016

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