बांहो का सरहाना

दे दे अपनी बाँहो को सरहाने में, की सुकून आ जाये ,
तू है मेरे साथ में हरदम बस , मुझे यकीन आ जाये,
ज़िन्दगी कम जो थी तेरी , तो साँस हम तुझे दे देते,
अब तो समां जा मेरी रूह में , ,,,,,,,
की चैनो सुकून मेरे भी नाम आ जाये ,
मिलेंगे तुझसे हम , खुद की उस जन्नत में ,
अब देर ना कर , बुला ले हमे भी ,
इस बैचैन दिल को अब करार आ जाये ,
दे दे अपनी बाँहो को सरहाने में, की सुकून आ जाये ,
तू है मेरे साथ में हरदम बस , मुझे यकीन आ जाये,

7 Comments

  1. babucm babucm 22/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/09/2016
  3. Markand Dave Markand Dave 23/09/2016
  4. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 23/09/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/09/2016
  6. Rupali21@ Rupali 23/09/2016

Leave a Reply