सपने में रेल (बाल कविता)

छुक छुक करती आई रेल
और मचा फिर ठेलम ठेल।।
हुई व्यवस्था सारी फेल।
चढने में हम जाते झेल।

यात्री करते भीषण शोर
लगा रहे सब अपना जोर।
कुली दौड़ते चारो ओर।
घात लगाये तकते चोर

मम्मी बोली बेटा जाग
हुआ सवेरा आलस त्याग।
टूटा सपना आया होश
सपने में था कैसा जोश।।

(चौपई छंद)

सुरेन्द्र नाथ सिंह ‘कुशक्षत्रप”

18 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 22/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016
  2. Anju Singh 22/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016
  3. Kumar Gaurav 22/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 22/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016
  5. Kajalsoni 22/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/09/2016
  6. Markand Dave Markand Dave 23/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/09/2016
  7. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 23/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/09/2016
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/09/2016
  9. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/09/2016

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