दर्द्से भी मुहोबत कर्लो…………………………………..धरित्रि मल्लिक

जिसने दर्द दीआ  हे,,,,,,,

वोही मेरा दवा भी हे……

दवा के बिना जो हालत होती हे,,,,,,

वो हाल हे मेरी………

अगर वो दर्द्से भी मुहोबत कर्लो,,,,,,

तो फिर दवा का भी इंतेजार ना होगी ये मेरे दोस्तों………

दर्दे दिल भी कभी दवा बन सकती हे,,,,,

ये सोच नहीं थी मेरी…………

अब ये भी पता लग गयी की,,,,,,

दर्द मे भी दवा छुपि हे………

बस अप्ने नज़रिया बदल नेकी ज़रूरत हे……..

दर्द मे भी ख़ुसी हे,,,,,,,

जिसने ढूंड लिया….. बस उससे जीना ही आगया…………….

यहाँ वहाँ ख़ुसी ढूँडने की कोसिश ख़तम  करो,,,,,,,,,

अपने अंदर ही एकबार झांकलो तो………..

ख़ुसी का समंदर ही तुममे समाया हे,,,,,,,,,,,

बस तुम्हे अपने आप को पेहेचनेकि ज़रूरत हे……………

10 Comments

  1. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 22/09/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 22/09/2016
  3. Pallavi 22/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/09/2016
  5. AKANKSHA JADON AKANKSHA JADON 22/09/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016
  7. C.M. Sharma babucm 22/09/2016
  8. Markand Dave Markand Dave 23/09/2016

Leave a Reply