मेरा ठिकाना-2—मुक्तक —डी के निवातियाँ

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अब किस किस को बतलाऊँ अपना ठिकाना
सीमा पर रहता हूँ, हर दिशा है आना जाना  
प्रेम से पुकारते है लोग मुझे कहकर जवान
कर्म – धर्म है मेरा इस माटी पर मिट जाना !!




डी के निवातियाँ_____@@@

10 Comments

  1. AKANKSHA JADON AKANKSHA JADON 22/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016
  3. C.M. Sharma babucm 22/09/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 22/09/2016
  5. Kajalsoni 22/09/2016
  6. Markand Dave Markand Dave 23/09/2016
  7. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 23/09/2016
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/09/2016
  9. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 23/09/2016

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