“तुम” …….. काजल सोनी

तुम मुझसे मोहब्बत करती हो ,
मुझे देख यू आहे भरती हो ।
प्यारी सी हो ,
अपनी भी ,
शर्माती तेरी आँखें ,
पल पल वो कह जाती है ,
जो मुझसे तुम न कहती हो ।

रातें तेरी कटती नहीं ,
करवटें बदलते रहती हो ।
कभी मुस्काती ,
कभी इठलाती ,
खुद को आईने में तकती हो।
कोरे कागज के पन्नों को ,
कोरे फेंकते रहती हो ।
अपने ही जज्बातों में बहकर ,
कुछ तुम भी तरसते रहती हो ।
तुम मुझसे मोहब्बत करती हो ,
मुझे देख यू आहे भरती हो ।

कुछ कहने की ख्वाहिश है ,
मुझे देख बहाने करती हो ।
अकेले रहती ,
तन्हाई में ,
मेरे लिए संवरती हो ।
नटखट सी है अदा तुम्हारी ,
बिन बोले सब कहती हो ।
गम में डूबा देख मुझे ,
बोलो क्यु सिसकती हो ।
माँगती हो खुदा से मुझको ,
मेरे लिए जीती और मुझ पर ही मरती हो।
तुम मुझसे मोहब्बत करती हो,
मुझे देख यू आहे भरती हो । ।

“काजल सोनी “

18 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016
    • Kajalsoni 22/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/09/2016
    • Kajalsoni 22/09/2016
  3. C.M. Sharma babucm 22/09/2016
    • Kajalsoni 22/09/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 22/09/2016
    • Kajalsoni 22/09/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 22/09/2016
    • Kajalsoni 22/09/2016
  6. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 22/09/2016
    • Kajalsoni 22/09/2016
  7. Kajalsoni 22/09/2016
  8. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/09/2016
    • Kajalsoni 22/09/2016
  9. Subhash soni 22/09/2016
    • Kajalsoni 22/09/2016

Leave a Reply