ख्वाबों की दुनिया


ख़्वाबों में जो देखि थी दुनिया,
वो दुनिया कितनी हसीन थी
शांति थी चारो ओर
खुशियां ही हर जगह बिखरी थी
न थे ये सीमायों के मसले,
न थे ये धर्मो के संकट,
मुस्कान हर चेहरे पर खिली थी
ख़्वाबों में जो देखि थी दुनिया
वो दुनिया कितनी हसीन थी
न थे ये शोर शराबे,
न थे ये खून खराबे,
इंसानो के दिलो में इंसानियत दिखी थी
ख़्वाबों में जो देखि थी दुनिया
वो दुनिया कितने हसीन थी
मगर ये दुनिया !!
ये दुनिया हिन्दू-मुसलमान की,
ये दुनिया भारत-पाकिस्तान की,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है !!
ये दुनिया तो न थी उन ख़्वाबों में
यहाँ तो हर रोज जवान मरते हैं,
यहाँ तो इंसान ही इंसानो से डरते हैं
न कभी उन ख़्वाबों के टूटने की उम्मीद थी
ख़्वाबों में जो देखि थी दुनिया,
वो दुनिया कितनी हसीन थी
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International Day of peace
21 September

8 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 21/09/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 21/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/09/2016
  4. C.M. Sharma babucm 21/09/2016
  5. Kajalsoni 21/09/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/09/2016
  7. Markand Dave Markand Dave 23/09/2016

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