शाहदत का दिन

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शाहदत का दिन हुई वीरों की पहचान अब
शौर्य से लडे वीरों से नही कोई अंजान अब
माँ भारती की गोद है इन वीरो को पुकारती
कौशल और वीरता का अंतिम इम्तिहान अब

लहू से दिया वीरों का यह बलिदान है
नम आँखों से याद करता हिन्‍दुस्‍तान है
अँधेरी रात भी दे रही है आज चांदनी
हर भरतीय के सीने मे आज जवान है
अभिषेक शर्मा अभि

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मुक्तक  रचना

 

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13 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/09/2016
  2. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 20/09/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/09/2016
  5. अकिंत कुमार तिवारी 20/09/2016
  6. Kajalsoni 20/09/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/09/2016

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