बर्बाद होने की कगार पर……….. मनिंदर सिंह

आ गया मैं बर्बाद होने की कगार पर,
हुआ ना शक मुझे अपनों की मार पर,,

मीठी मीठी बातों में लुटता चला गया,
हँसता है जग सारा देख मेरी सार पर,,

हम साया बनकर साथ चले थे वो मेरे,
यकीन नहीं आता अपनी इस हार पर,,

कहते थे खुशियो का बगीचा सजा देंगे,
तन्हा हुआ बैठा हूँ उनके बनाये थार पर,,

टूटे घड़े कभी किसी को पार नहीं लगाते,
गैरो से ज्यादा अपने ही जी रहे है खार पर,,

15 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/09/2016
    • mani mani 26/09/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 20/09/2016
    • mani mani 26/09/2016
  3. babucm babucm 20/09/2016
    • mani mani 26/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
    • mani mani 26/09/2016
    • mani mani 26/09/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 20/09/2016
    • mani mani 26/09/2016
  6. Kajalsoni 20/09/2016
    • mani mani 26/09/2016

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