हार-4….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

“फिर मिलेंगे”….
झकझोर दिया मेरे अंतर्मन को…
इस आवाज़ ने…..
उसकी आँखों की चमक…
एक पल तो दिल को सुकून देती है…
और दूसरे ही पल लगने लगता है…
कि क्यूँ मुझमें वो नहीं है…
क्या है ऐसा जिस से मैं आजतक अनभिज्ञ हूँ….
इतना ज्ञान जिस पर मुझे घमंड है वो चुप्प था…
सब पैसा..आराम सुख सुविधा के साधन…सब आज मौन थे…
किसी के पास कोई जवाब नहीं था…
किसी से क्या पूछता मैं…क्या सवाल करता….
जब अपने मन में ही मुझे खुद को नहीं पता था…
आखिर क्या था उसके पास….

इतने में कानों में एक बहुत ही पुराने गीत की आवाज़ सुनायी पड़ती है…
“घूंघट के पट खोल रे तोहे पिया मिलेंगे”…..
बचपन में जब कभी रेडियो पे बजता था…
पापा साथ साथ गुनगुनाते थे….
बहुत कम गीत थे वो गुनगुनाते थे…उनमें से एक यह था…
और मैं हंस पड़ता था…यह कहता था कि दुल्हन के लिए गाना है…
फिर पापा ने एक दिन बताया की “घूंघट” का मतलब यहाँ…
अपने मन…आँखों…अक्ल…पर पड़े पर्दों की बात हो रही है…
जब वो परदे हट जाते हैं तो हम अपने आप से मिलते हैं….
पिया से मिलते हैं….

आज अचानक फिर से ये गीत सुना तो सब स्मृति पटल पर उभर आया…
कहीं वो ‘इंसान’ भी तो इसी की बात तो नहीं कर रहा था कि…
“जब अंदर की भाग दौड़ ख़तम होती तो संतुष्टि मिलती”…..
ऐसा लगा जैसे कोई रौशनी की किरण मिली हो…
जो मन बुझा सा….हारा हारा सा था अपने से….
लगा जैसे उसमें कोई चेतना सी प्रवाहित होने लगी है….
मैं भी हारना नहीं चाहता था….
उठा…लड़ने के लिए…
अपने आप से…
सिर्फ अपने आप से…
\
/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

20 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/09/2016
    • babucm babucm 20/09/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/09/2016
    • babucm babucm 20/09/2016
  3. shivdutt 20/09/2016
    • babucm babucm 20/09/2016
  4. mani mani 20/09/2016
    • babucm babucm 20/09/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 20/09/2016
    • babucm babucm 20/09/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
    • babucm babucm 20/09/2016
    • babucm babucm 20/09/2016
  7. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 20/09/2016
    • babucm babucm 21/09/2016
  8. Kajalsoni 20/09/2016
    • babucm babucm 21/09/2016
  9. ALKA ALKA 20/10/2016
    • babucm babucm 20/10/2016

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