औकात बता दो


*औकात बता दो*

दुश्मन के सीने चढ़कर
औकात बता दो सारी!
हद पार कर दिया दम्भी
आ गयी मौत की बारी !!

लहू का घूंट पीकर
रह सकते कैसे जिंदा!
जुलमी बुझदिल हमको
करता जाता शर्मिन्दा!!

बाँध तिरंगा सर पर
छुड़ा दो सब मक्कारी!
हद पार कर दिया दम्भी
आ गयी मौत की बारी !!

चुप रहकर क्या मिलेगा
बदकार बन गया घाती
अब नहीँ सहन करना है
चढ़ जाओ उसके छाती

मटियामेट अब कर दो
झंखे उसकी महतारी
हद पार कर दिया दम्भी
आ गयी मौत की बारी !!

सामने आने से डरता
ये दगाबाज कुकर्मी
छुपकर वार है करता
मानेगा नहीं अधर्मी”

नादान का चिथड़ा कर दो
फ़िर करे नहीं गद्दारी
हद पार कर दिया दम्भी
आ गयी मौत की बारी !!

दुश्मन के सीने चढ़कर
औकात बतादो सारी !!

*(ऊरी में हमारे जाबाज सैनिको पर पाक द्वारा भाड़े के टट्टूयों द्वारा कायराना हमले पर मेरी तात्कालिक प्रतीकात्मक रचना)*

✍ *डॉ. सी. एल. सिंह*

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/09/2016
  2. C.M. Sharma babucm 20/09/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016

Leave a Reply