मौसम

मौसम…
“काले बदरा आसमान में,
घनन घनन घिर आये,
छमछम छ्मछ्म बारिश की,
यहाँ आकर झड़ी लगाये,
चारों और फैली हरियाली,
पेड़ों की हर अदा निराली,
फूलों की खुशबू से
वातावरण महका जाए,
कूं कूं कूं कूं कोयल कूंके,
मोर भी अपने पंख फैलाये,
झूमझूमकर झूमझूमकर
सबको नृत्य दिखाये,
ऐसे में मेरा मन भी,
बावरा हुआ जाए,
मौसम ने किया मदहोश मुझे,
मन प्यार भरे गीत ये गाये,
इस हसीं मौसम में स्वाति,
प्रदीप राग की तान सुनाये,
सुहाने से इस मौसम को,
फिर और रंगीं बनाये।।”
By:Dr Swati Gupta

12 Comments

  1. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 19/09/2016
  2. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 19/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016
  5. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016
  6. C.M. Sharma babucm 19/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016

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