बचपन की दोस्ती

I want to dedicate this poem to my childhood friends..
बचपन के दोस्त मिले जब हमको,
एक प्यारा सा अहसास हुआ,
मन में मची फिर से हलचल,
दिल फिर से मेरा बच्चा बन गया।
याद आगयी हमें बीती हुई बातें,
वो स्कूल के दिन और प्यारी सी यादें,
वो खेलना, पढ़ना, लड़ना, झगड़ना,
अगले ही पल संग में मस्ती करना,
याद आगया फिर से गुजरा हुआ जमाना।
बचपन के दोस्त मिले जब हमको,
एक प्यारा सा अहसास हुआ।।
ऐसा लगा जैसे बिछड़े थे कुम्भ में हम,
दो दशक बाद फिर से वापस मिले,
आवाज सुनी अपनी सखियों की जब
ख़ुशी से भर आयी मेरी आँखे,
दूरियां और समय भी,
न कर पायी हमारी दोस्ती को कम,
अहसास लिए अपनेपन का,
ये दोस्ती थामे नजर आयी मेरी बाँहें।
बचपन के दोस्त मिले जब हमको,
एक प्यारा सा अहसास हुआ।।
रखती हूँ खुदा से यही आस मैं,
अब मिले है,तो न बिछड़े कभी हम,
सलामत रहे ये दोस्ती हमारी,
दिनोदिन रंग लाये दोस्ताना हमारा,
बचपन की इस दोस्ती पर,
नाज करे ये जमाना सारा।
बचपन के दोस्त मिले जब हमको,
एक प्यारा सा अहसास हुआ,
मन में मची फिर से हलचल,
दिल फिर से मेरा बच्चा बन गया।।
By:Dr Swati Gupta

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016
  3. babucm babucm 19/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016

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