तुम तो कातिल ना थे…

तुम  तो  कातिल  ना  थे,,,,
फिर  मेरी  जान  पे  कैसे  बन  आयी…
तुम्हारे साथ  बिना  बेजान  सी  हे  मेरी  ज़िंदगी…..
कब  मुझ  मे  भी  जान  आएगी
बेवफा  तो  हम  नहीं  थे…
तो  किस  बात  की  सज़ा  दी  आपने…
यूं तो  तुम  भी  हम  से  मोहब्बत करते  थे…
मैने  क़ुबूल  की  पर  तुमने  छुप्पाया…
कभी  तुम कहते थे की कभी  मेरा  हाथ  ना छोड़ना….
मगर  में  तुम्हारा  हाथ  के  सिवा  किसी  को  ना  थामा,,,
पर  आपने  तो  किसी  और  का  ही  हाथ  थाम  लिया ,,,,,
और  कसम  मुझ  से  ले  लिया  जीवन  भर  ना  हाथ  छोड़ूँ आपका…
खुद  तो  चले गये  किसी  और की बाहों  मे….
छोड़ दिया हमें तन्हाई  मे  अकेले  मरने  के  लिए….
क्या यही है मोहब्बत ??
क्या  यही  हे  सज़ा-ए-मोहब्बत.???

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 19/09/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 19/09/2016
    • Dharitri Dharitri 19/09/2016
  3. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 19/09/2016
    • Dharitri Dharitri 19/09/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016
    • Dharitri Dharitri 19/09/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/09/2016

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